(पाषाण-युगीन मन की अभिलाषा)
पढ़ चुका हूँ हिंदी, अंग्रेजी और गणित,
गोया कि, मुझे मालूम है भौतिकी के नियम
पढ़े हैं भाषा और व्याकरण के नियम, पर यह
कितना सरल हूँ, कि बुद्ध की निर्वाण कथा पढ़कर
दीमकों-सा किताब पढ़ कर, अनपढ़ ही रहना चाहता हूँ,
कुँए की मुँडेर पर बैठ कर सुनना चाहता हूँ घड़े और पानी का संगीत
― प्रकाश